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Oct 03, 2009
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Shayari..

 

03-10-2009

बहुत सी बाते होती है ऐसी जिनका जवाब नहीं होता कोई / दस साल गुज़र गए है हमारी जुदाई को / फिर भी मिटा नहीं पाया हूँ मैं अपनी तन्हाई को / कहता हूँ के मैं उसे भूल चूका हूँ / मगर फिर भी यही हकीक़त हैं / के आज भी मुझे उसकी कल जितनी ही ज़रुरत है / जिंदगी उसके बिन है खली खली / प्यार के लम्हे है आज भी सवाली / मिलेगी कहापर मुझे ऐसी किताब / जो दे मेरे इन सवालो के जवाब / बहुत सी बाते होती है ऐसी जिनका जवाब नहीं होता कोई

 

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